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पछुआ हवा बनी आफत, खेतों में आग से किसानों की सालभर की मेहनत राख

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बिहार के कई जिलों में भीषण आग से गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। सिवान, रोहतास और नवादा में किसानों को भारी नुकसान, मुआवजे की मांग तेज।

पटना/आलम की खबर:बिहार में इन दिनों चल रही तेज पछुआ हवाओं और लापरवाही भरी बिजली व्यवस्था ने किसानों के लिए बड़ी आफत खड़ी कर दी है। राज्य के कई जिलों में अचानक लगी आग ने सैकड़ों एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल को जलाकर राख कर दिया है। सिवान, रोहतास और नवादा जैसे जिलों से सामने आई घटनाओं ने ग्रामीण इलाकों में हाहाकार मचा दिया है। कटाई से ठीक पहले हुई इस तबाही ने किसानों की सालभर की मेहनत को पल भर में खत्म कर दिया।

घटनाओं की सबसे बड़ी वजह तेज हवाओं के साथ-साथ बिजली के तारों से निकली चिंगारियां बताई जा रही हैं। जैसे ही कहीं आग की छोटी सी लपट उठी, पछुआ हवा ने उसे विकराल रूप दे दिया और देखते ही देखते लहलहाते खेत धुएं और राख में तब्दील हो गए। कई जगहों पर ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन हवा के तेज झोंकों के सामने उनके प्रयास बेअसर साबित हुए।

सिवान जिले के आंदर अंचल स्थित एक गांव में आग ने अचानक विकराल रूप ले लिया। बिजली के शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारी ने गेहूं के खेतों को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ ही मिनटों में कई बीघा फसल जलकर नष्ट हो गई। ग्रामीणों ने बाल्टी, पानी और पेड़ों की डालियों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। कई किसानों की तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।

इसी तरह रोहतास जिले में आग ने और भी भयावह रूप दिखाया। यहां एक गांव में लगभग 50 एकड़ से ज्यादा खेतों में लगी आग ने भारी तबाही मचाई। खेतों में खड़ी सुनहरी फसल कुछ ही देर में काले राख में बदल गई। दूर-दूर तक धुएं के गुबार दिखाई दे रहे थे और ग्रामीणों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक किसानों का बड़ा नुकसान हो चुका था।

नवादा जिले में भी हालात कम गंभीर नहीं रहे। यहां अचानक लगी आग ने कई किसानों की फसल को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीण दमकल के पहुंचने का इंतजार करते रहे, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। कई किसानों ने रोते हुए बताया कि यही फसल उनके परिवार के लिए सालभर का सहारा थी, जो अब पूरी तरह खत्म हो गई है।

इन घटनाओं ने किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। अधिकांश किसानों ने खेती के लिए कर्ज लिया था और अब फसल जल जाने के बाद उनके सामने कर्ज चुकाने और परिवार चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवारों के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं है।

स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। राजस्व कर्मियों को घटनास्थल पर भेजा गया है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार से मांग की है कि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें।

वहीं, ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि खेतों के ऊपर से गुजर रहे जर्जर और ढीले तार लगातार खतरा बने हुए हैं। गर्मी के मौसम में इन तारों से चिंगारी निकलने की घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए बिजली व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ खेतों के आसपास अग्नि सुरक्षा के उपाय भी जरूरी हैं। समय रहते यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हर साल किसानों को इसी तरह के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल, राज्य के विभिन्न जिलों में आग की घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि प्राकृतिक परिस्थितियों और व्यवस्थागत खामियों के बीच सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को ही उठाना पड़ रहा है। अब सभी की नजर सरकार की ओर है कि प्रभावित किसानों को कब तक राहत मिलती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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